बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला (1411, सिम्हा और ग़दर) – समीक्षा और अंदर के चित्र
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बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला (1411, सिम्हा और ग़दर) – समीक्षा और अंदर के चित्र

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बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला – सार

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला में अब तक तीन भाग आ चुके है जिनके नाम है 1411, सिम्हा और ग़दर क्रमश।  बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला का अगला भाग कोडिया जल्दी ही आने वाला है। 

बजरंगी की परिकल्पना फेनिल शेरडीवाला जी की है और इसके लेखन में उनका साथ दिया है वीरेंदर कुशवाह ने।  बजरंगी की परिकल्पना करते हुए फेनिल शेरडीवाला जी ने इस बात को प्राथमिकता दी है की उनकी कहानी का हीरो पूरी तरह देसी लगे।  बजरंगी गाओं का रहने वाला एक जिनगारी योद्धा था जिसने अंग्रेज़ो के खिलाफ लड़ाई में एक एहम भूमिका निभाई थी। 

कहानी की शुरुआत होती है कहानी के मुख्य नायक से जिसका नाम है वज्र।  वज्र शहर से पढाई पूरी कर के अपने गाओं कई साल बाद लौटा है।लेकिन गाओं लौट ते ही उसका सामना एक ऐसे गिरोह से हो जाता है जो बाघ को मार के उनकी खाल की तस्करी करते है।  इस गिरोह से सामना करते हुए हो वो बुरी तरह चोटिल हो जाता है और जल्द ही उसे मालुम पड़ता है की उसे माँ बाप से भी ज्यादा प्यार देने वाले सुलेमान चाचा के गायब होने के पीछे भी यही गिरोह है।  कहानी बहुत सीधी साधी है जिसे पढ़ते हुए आप को लगेगा जैसे कोई पुरानी हिंदी फिल्म देख रहे हो।  ऐसा कहने की खास वजहें तो नहीं लेकिन आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते है की कहानी के हीरो का नाम बजरंगी है।  वो गाओं के सरपंच का बेटा है जो गाओं के हालातो से बिलकुल रूबरू नहीं है।  उसे अपने परिवार के बारे में भी उतना नहीं पता जितना गाओं वालो को।  गाओं की परेशानी का सबब बन चूका गिरोह पुरानी फिल्मो के डाकुओ की याद दिलाता है जो समय समय पर गावों में कर इकठा करने के लिए हमला कर देते थे। 

तीनो भागो में कहानी जो थोड़ा बहुत सस्पेंस बनाने में कामयाब होती है वो है वज्र और बजरंगी के बीच के सम्बन्ध का राज़।  कहानी में एक नकाबपोश भी है जो वज्र की जगह जगह पर मदद कर रहा है।  कौन है ये नकाबपोश ? जान ने के लिए आपको पढ़नी होगी बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला। 

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बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला – कहानी की गति, विषय, पकड़ और असर – 4

बजरंगी की कहानी का विषय पुरानी हिंदी फिल्मो से मेल खाता है जिस से जुड़ाव महसूस करना आजकल की पीढ़ी के लिए मिश्किल हो सकता है।  विषय में दिलचस्पी बनते बनते श्रृंखला का तीसरा भाग ख़तम हो जाता है।  कहानी के विषय को 5 अंक।

कहानी की गति बहुत धीमी है और उसकी वजह है की कहानी में ख़ास मुद्दों को छोड़ कर बहुत सी गैर जरुरी चीज़ो को खिंचा गया है।  कहानी की गति और पकड़ को 2 अंक।

कहानी के अंत तक आते आते एक आध सस्पेंस की वजह से कहानी का असर औसतन बन गया। कहानी के असर को 5अंक।

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला के सुलेख और ग्राफ़िक डिज़ाइन – 5

कहानी के सुलेख बिलकुल भी प्रभावशाली नहीं है।  लेकिन डायलॉग्स में कहीं भी किसी तरह की गलती नहीं है।  ग्राफ़िक डिज़ाइन भी बहुत साधारण है।  कहानी में कोई भी डायलाग किसी भी तरह का सकरात्मक असर बनाने में नाकाम रहे  है। 

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला के अंदर का चित्रांकन – 4

चित्रांकन बहुत कमज़ोर है।  हमें चित्रांकन औसत से भी निचे के स्तर का लगा।  किसी भी नए भारतीय कलाकार को काम देना एक सराहनीय कदम है लेकिन किसी भी अपरिपकव काम के लिए अगर आप को दाम तुलनात्मक दृष्टिकोण से बाकी अनुभवी कलाकारों के द्वारा रचित कॉमिक बराबर चुकाना पड़े तो ये किसी को भी रास आना मुश्किल है। 

चित्रांकन में सबसे कमज़ोर चेहरों की रचना है और रंगसज्जा में भी साफ़ साफ़ अनुभव की कमी देखी जा सकती है। 

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बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला का आवरण – 4.5

bajrangi 1411

तीनो ही कवर आर्ट्स में कोई नयापन नहीं है।  1411 का आवरण फिर भी औसतन दर्जे से ऊपर का है लेकिन अगले 2 भागो के चित्रांकन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है।  तीसरे भाग यानी ग़दर में तो बजरंगी की शारीरक रचना बिलकुल ही अजीबो गरीब है। 

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला – मुख्य सदस्य

  • परिकल्पना – फेनिल शेरडीवाला
  • लेखक – वीरेंद्र कुशवाह, फेनिल शेरडीवाला
  • चित्रांकन – आनंद जाधव
  • रंगसज्जा – हरेंद्र सिंह सैनी
  • शब्दांकन – दयाल सिंधी
  • मुखपृष्ठ – आनंद जाधव , योगेश पूगांवकर, भक्त रंजन
  • संपादक – फेनिल शेरडीवाला
  • सहयोग – व्योम मिश्रा
  • शब्दांकन – संदीप गुप्ता (सिम्हा)

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला – अन्य जानकारी

  • कुल पन्ने – 1411 में 40, सिम्हा में 20, ग़दर में 24 (कुल – 84)
  • भाषाओ में उपलब्ध – हिंदी
  • पेपर – ग्लॉसी
  • कवर – पेपरबैक

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला – कहाँ से खरीदे

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला आप फेनिल कॉमिक्स की आधिकारिक वेबसाइट से खरीद सकते है।  सीधे खरीदारी के लिंक पर जाने के लिए यहाँ जाएं 👉 बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला

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Bhupinder Thakur Superunique

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बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला समीक्षा
  • 4/10
    कहानी की गति, विषय, पकड़ और असर - 4/10
  • 5/10
    सुलेख और ग्राफ़िक डिज़ाइन - 5/10
  • 4/10
    अंदर का चित्रांकन - 4/10
  • 5.5/10
    आवरण यानी कवर आर्ट - 5.5/10
4.6/10

बजरंगी वानप्रस्थ श्रृंखला - सार

कहानी की शुरुरात होती है कहानी के मुख्य नायक से जिसका नाम है वज्र।  वज्र शहर से पढाई पूरी कर के अपने गाओं कई साल बाद लौटा है।  लेकिन गाओं लौट ते ही उसका सामना एक ऐसे गिरोह से हो जाता है जो बाघ को मार के उनकी खाल की तस्करी करते है।  इस गिरोह से सामना करते हुए हो वो बुरी तरह चोटिल हो जाता है और जल्द ही उसे मालुम पड़ता है की उसे माँ बाप से भी ज्यादा प्यार देने वाले सुलेमान चाचा के गायब होने के पीछे भी यही गिरोह है।  कहानी बहुत सीधी साधी है जिसे पढ़ते हुए आप को लगेगा जैसे कोई पुरानी हिंदी फिल्म देख रहे हो।  ऐसा कहने की खास वजहें तो नहीं लेकिन आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते है की कहानी के हीरो का नाम बजरंगी है।  वो गाओं के सरपंच का बेटा है जो गाओं के हालातो से बिलकुल रूबरू नहीं है।  उसे अपने परिवार के बारे में भी उतना नहीं पता जितना गाओं वालो को।  गाओं की परेशानी का सबब बन चूका गिरोह पुराणी फिल्मो के डाकुओ की याद दिलाता है जो समय समय पर गावों में कर इकठा करने के लिए हमला कर देते थे। 

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  1. I have read some fenil comics and I like their stories and happy to see that they are making comics on topics like this this will spread awareness and as well as entertain us 😊😊

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