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हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (Set 1) – समीक्षा और अंदर का चित्रांकन

हवलदार बहादुर – परिचय

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स का एक बहुत ही लोकप्रिय किरदार रहा है। इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते है की मनोज कॉमिक्स के प्रकाशन को बंद हुए २ दशक बीत चुके थे लेकिन हवलदार बहादुर की यादें अभी भी उसके पाठको के बीच धूमिल नहीं हुई थी। और ये हवलदार बहादुर की ख़तम न होने वाली लोकप्रियता और उसके प्रशंसकों की हट का ही नतीजा है जो हवलदार बहादुर का पुनः प्रकाशन मुमकिन हो पाया है। 

लेकिन अक्सर देखा गया है की पुरानी कॉमिक्स को पसंद करने के पीछे अतीत के सुनहरे दिनों की यादे ही रहती है, जिसे हम नास्टैल्जिया भी कहती है।  यही वजह है की हमने हवलदार बहादुर के पुनः प्रकाशित पहले सेट की समीक्षा करने का सोचा।  ये कॉमिक समीक्षा खासतौर पर आज के युवा वर्ग के लिए। 

हवलदार बहादुर – कहानी

हवलदार बहादुर सेट 1 में 4 कॉमिक्स पुनः प्रकाशित हुई है। जिनके नाम है:

  • हवलदार बहादुर
  • हवलदार बहादुर और डाकुओ का गिरोह
  • हवलदार बहादुर और नशे के तस्कर
  • हवलदार बहादुर और उस्ताद पेड्रो

सभी कॉमिक्स में कहानिया खुद में परिपूर्ण है। हवलदार बहादुर का नाम बहादुर सिंह है जो अपने तकिया कलाम के लिए उसके प्रशंसकों के बीच मशहूर है।  “हवालात में सड़ा दूंगा ।  ये पढ़ कर आप को शायद ये संवाद ख़ास न लगे लेकिन एक बार आप हवलदार बहादुर पढ़ कर ख़तम करे और आप समझ जाएंगे की एक संवाद कैसे किसी किरदार में जान डाल देता है।  बहादुर सिंह का नाम तो हवलदार बहादुर है लेकिन इनके शरीर का कायाकल्प इनके नाम का साथ दूर दूर तक नहीं देता।  लेकिन इनका शरीर जैसा भी हो, हवलदार बहादुर हमेशा अपनी ड्यूटी पर सचेत और अपनी साख बचाने के लिए तत्पर रहते है। खुद को साबित करने के लिए चाहे उन्हें बड़े से बड़े गिरोह से भिड़ना क्यों न पड़े वो कभी पीछे नहीं हटते। 

हवलदार बहादुर की कहानिया हास्य से भरपूर तो है ही लेकिन कहानिओ में रहस्य भी भरपूर भरा रहता है।  हवलदार बहादुर के किरदार को परोसा बेशक एक हास्य भूमिका में गया है लेकिन कहीं न कहीं ये हर एक इंसान के भीतर चल रही कश्मकश को भी ब्यान करता है। जैसे हवलदार बहादुर हमेशा अपनी बहादुरी का सबूत तो देना चाहता है लेकिन किसी भी परिस्थिति में फस जाने के बाद वो खुद को कोसने लगता है।  अगर संक्षिप्त में कहें तो हवलदार बहादुर सभी के लिए तो बहादुर है लेकिन उनकी बहादुरी के पीछे हमेशा या तो उनकी नासमझी या मूर्खता छुपी रहती है। 

हवलदार बहादुर सैट 1 की चारो कहानिया का चित्रांकन स्वर्गीय जीतेंद्र बेदी जी और लेखन विनय प्रभाकर जी ने किया है ।  और चारो ही कहानिया बहुत मजेदार है। 

कहानी की गति

लगभग दोषरहित है।  अंक 9

कहानियों के विषय

कहानियो के विषय बहुत आम है लेकिन विनय प्रभाकर जी की लेखन शैली ने इन्हे बहुत ख़ास बना दिया। कहानियो के विषय आम होने के बावजूद ये अंदाज़ा लगाना आसान नहीं था की हवलदार बहादुर इस बार किस तरह अपनी बहादुरी का सबूत देंगे।  अंक 9

कहानियों का असर

कहानियो का असर सच में गजब रहा।  क्यूंकि इसी असर के कारण हमें ये समीक्षा लिखनी पड़ी।  अंक 10

कहानियो की पकड़

कहानिया आप को शुरुआत से अंत तक पकड़ कर रखती है।  ऐसा लेखन आज कल के समय में बहुत हे मुश्किल से पढ़ने को मिलता है।  अंक 10

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सेट 1) – संवाद

कहानी के संवाद बहुत ही बढ़िया है। चारो ही कहानिया पढ़ के बहुत समय बाद महसूस हुआ की संवाद अगर अच्छे हो तो वो बहुत आम कहानिओ को भी ख़ास बना देते है। 

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सेट 1) – चित्रांकन और रंगसज्जा

  • अंदर का चित्रांकन – 10
  • आवरण – 10
  • रंगसज्जा – 10

चित्रांकन ने लेखन का खूब साथ निभाया है और हमें हैरत हुई की कॉमिक्स पढ़ते हुए कहीं भी ऐसा महसूस नहीं हुआ की चित्रांकन में कोई भी कमी है।  ये जादू स्वर्गीय जीतेन्द्र बेदी जी का है। 

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सेट 1) – ग्राफ़िक डिज़ाइन, रंगसज्जा और अभिलेख

तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी कॉमिक्स होने के बावजूद चारो कॉमिक्स का ग्राफ़िक डिज़ाइन बहुत ही आकर्षक है।  चित्रांकन को जीवंत कर देने में भी रंगसज्जा और ग्राफ़िक डिज़ाइन का काफी एहम किरदार है।  कॉमिक्स को अंक देते वक़्त इस बात को ध्यान रखा गया है की ये काम तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है।

  • ग्राफ़िक डिज़ाइन – 10

अभिलेख पढ़ने में कोई समस्या नहीं हुई लेकिन कहीं कहीं अभिलेख बहुत धुंदले दिखाई पड़े है। ये प्रिंटिंग की समस्या भी हो सकती है तो हम यहाँ ज्यादा अंक नहीं काटेंगे।  अंक 9

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सैट 1) – मुख्य सदस्य

  • लेखक – विनय प्रभाकर
  • चित्रांकन – स्वर्गीय जीतेन्द्र बेदी

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सैट 1) – कॉमिक्स के बारे में जानकारी

  • कुल पन्ने – 32 प्रति कॉमिक
  • भाषाओ में उपलब्ध – हिंदी
  • पेपर – मैट (matte)
  • मूल्य – 70 प्रति कॉमिक , कुल सेट की कीमत – 280

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सैट 1) – कहाँ से खरीदे

हवलदार बहादुर आप www.comicsadda.com से खरीद सकते है।

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सेट १)
  • 9.5/10
    Story - 9.5/10
  • 10/10
    Dialogues - 10/10
  • 10/10
    Illustration, Sequential Art and Colors - 10/10
  • 9.5/10
    Graphic Design and Letters - 9.5/10
9.8/10

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स (सेट 1) - निष्कर्ष

हवलदार बहादुर मनोज कॉमिक्स का एक बहुत ही लोकप्रिय किरदार रहा है। इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते है की मनोज कॉमिक्स के प्रकाशन को बंद हुए २ दशक बीत चुके थे लेकिन हवलदार बहादुर की यादें अभी भी उसके पाठको के बीच धूमिल नहीं हुई थी। और ये हवलदार बहादुर की ख़तम न होने वाली लोकप्रियता और उसके प्रशंसकों की हट का ही नतीजा है जो हवलदार बहादुर का पुनः प्रकाशन मुमकिन हो पाया है। 

लेकिन अक्सर देखा गया है की पुरानी कॉमिक्स को पसंद करने के पीछे अतीत के सुनहरे दिनों की यादे ही रहती है, जिसे हम नास्टैल्जिया भी कहते है।  यही वजह है की हमने हवलदार बहादुर के पुनः प्रकाशित पहले सेट की समीक्षा करने का सोचा।  ये कॉमिक समीक्षा खासतौर पर आज के युवा वर्ग के लिए। 

3 Comments

  1. YASHU PARMAR

    HB to bhiaya hai hi acha.. i hope ab comic scoop dc marvel image pe bhi weekly review de.. apke unbiased reviews mere jaise readers ke liye bht appropriate hai..par ab art se jyada story ko rate kare..aur behtar hoga..baki i am now looking for king in black review from your side..apke liye agey aur bhi tough hoga reviews dena kyuki ab logo ka bharosa aur umeede apse badi hai..and i believe comic scoop uspe khara utarega.. 😊 keep growing

  2. Shoaib

    I thoroughly enjoyed reading Hawaldar Bahadur , I didn’t read any Manoj comics before this.. but this character made me fall in love with him on my first read . I usually enjoy comedic characters like this like Bankelal.. I didn’t have any expectations at first but man oh man this was too good and your review as well this well help people encourage to grab it you have explained every aspect really well.
    If you’re having a bad day , give this a read and that’s it you’ll instantly feel better !
    Even my mom and brother also read it who usually don’t read much comics nowadays, but they enjoyed Hawaldar Bahadur very much.. I hope manoj comics keeps bringing us more fun filled issues like this !

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