zaalim manjha comic by bullseye press review

ज़ालिम मांझा – समीक्षा (No Spoiler Review)

ज़ालिम मांझा कहानी है कैदी माइकल मांझा की जो की एक पागलखाने में कैद है. कहानी की शुरुरात होती है जॉब की तलाश करते हवेली पहुंची नीना जोसफ से, जो की पागलखाने के लिए इस्तेमाल हो रहा हैI

हवेली में प्रवेश करने के बाद से ही नीना के सर में तेज़ दर्द शुरू हो जाता हैI नीना को जल्द ही अपनी शिफ्ट में काम कर रहे मैनेजर सारा काम समझा देते है और सेल नंबर 9 से दूर रहने को कहते हैI

आखिर सेल नंबर 9 में ऐसा कौन सा मरीज है? और और उस से ख़ास दूरी बनाए रखने की क्या वजह है? नीना जोसफ के सिरदर्द होने के पीछे क्या कोई हवेली का राज़ है? ये सभी सवालों क जवाब इतने लाजवाब है की इन्होने ज़ालिम मांझा को बना दीआ है अब तक की प्रकाशित बुल्सआई कॉमिकस में से नंबर 1 कॉमिकI

ज़ालीम माँझा यानी अपना भाई माएकल माँझा, ज़िसका सबको बेसब्री से इंतेजार था, अपनी उमीदो पर खरा उतरती हैI अगर वाकई किसी कहानी को पढ़ने में मुझे हाल ही में सब से ज्यादा मजा आया हो तो वो है ज़ालिम मांझाI कॉमिक को पढ़ने के बाद जितनी ख़ुशी हुई उसे से एक ही ख्याल सबसे पहले आया की इसे कहते है फटा पोस्टर निकला हीरो

चित्रांकान मौरेशियो द्वारा कीआ गया है जो बेहद ही अलग और दिलचस्प हैI कहानी के लेखक अपने सुदीप मेनन जी है जिनकी ज़ितनी भी तारीफ की जाएं कम हैI मतलब हीरो माएकल जब आता है तो बस यू समझो बस हम हम बाकी पानी कमI किसी भी नए हीरो की पहली कोमिक में जोरदार छाप छोडना कोई आसान काम नही खास्तौर पर तब जब आपके पास बस 28 पृष्ट होI हिंदी अनुवाद हमारे मंदार गंगेले जी का है ज़िनहीने कहानी में जान डालने में एहम भूमिका निभाई हैI

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ज़ालिम मांझा  कॉमिक को कुल अंक – 10

कहानी, उसका असर और उसका विषय – 10

लगभग सभी बुल्सआई कॉमिक्स में जो सब से मजबूत कड़ी है वो है इनकी कहानी तो आप मुझसे हमेशा अपेक्षा पुरे 10 अंक की कर सकते है. कहानी की गति और कहानी में रूचि एक पैनल में भी कम नहीं होती. कहानी में सस्पेंस शुरू से ही बना रहता है और धीरे धीरे जब सभी राज़ो से पर्दा उठने लगता है तो उत्सुकता बढ़ती जाती है. कहानी के अंत में तो घटित होता है उसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी . ये देखने योग्य होगा की सुदीप मेनन जी कहानी को आगे कैसे बढ़ाते है और इसका स्तर कैसे बनाए रखेंगे .

कवर आर्ट – 10

कवर आर्ट और रंगसज्जा लाजवाब हैI 2 प्रकार के कवर आर्ट्स के साथ प्रकाशित हुई ज़ालिम मांझा के कवर आर्ट्स ने लोगो के बीच उत्सुकता बढ़ाने में काफी मदद की थीI हिंदी कवर आर्ट जहां मजेदार है वही अंग्रेजी आर्ट में बेरहम ज़ालिम मांझा दिखाई देता हैI

डायलाग अथवा संवाद – 10

कहानी के संवाद और डायलॉग्स मंदार गंगेले जी के द्वारा लिखे गए हैI डायलॉग्स एक एहम किरदार निभाते है माइकल मांझा की छवि को एक मजेदार और दिलफेंक किरदार बनाने मेंI मुझे लगता है की कोई भी कहानी बुल्सआई पर फ्लॉप नहीं हो सकती जब तक सुदीप मेनन और मंदार गंगेले जी की जोड़ी यूँ ही काम करती रहेगीI

अंदर के पृष्टो का चित्रांकन और रंगसज्जा – 9

अंदर के पृष्टो में चित्रांकन और रंगसज्जा कॉमिक का दूसरा सब से मुख्या हिस्सा हैI चित्रांकन और रंगसज्जा इतना अलग और बेहतर है की आप बार बार ये कॉमिक देखना पसंद करेंगेI चित्रांकन और रंगसज्जा दोनों ही मौरिशिओ ने की है जो की चिली के रहने वाले एक जाने माने चित्रकार हैI मौरिशिओ ने ज़ालिम मांझा और आस पास के वातावरण को ऐसा रूप और रंगो से सजाया है की आप उनके बारे में जान ने के इच्छुक हो जाएंगेI

  • चित्रांकन – 8
  • रंगसज्जा – 10
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निष्कर्ष

ज़ालिम मांझा हाल में प्रकाशित हुए कॉमिक्स का सबसे अलग किरदार है जिसमे देसीपन तो है ही साथ ही जिस दिलचस्प अंदाज़ में उसकी एंट्री हुई है वो आपके दिल और दिमाग में छाप छोड़ती हैI ये कॉमिक छोड़ने वाली बिलकुल नहीं है और अगर आप बुल्सआई पढ़ने की शुरुआत करना चाहते है तो आप बेझिझक यहाँ से शुरुरात कर सकते हैI

ज़ालिम मांझा के कुछ चित्र

आपको मेरे द्वारा दिए जा रही समीक्षा कैसी लग रही है, कमेंट जरूर करे!

ज़ालिम मांझा की समीक्षा
  • 10/10
    कहानी - 10/10
  • 10/10
    कवर आर्ट - 10/10
  • 10/10
    डायलाग अथवा संवाद - 10/10
  • 9/10
    अंदर के पृष्टो का चित्रांकन और रंगसज्जा – 9 - 9/10
9.8/10

ज़ालिम मांझा का सार

ज़ालीम माँझा यानी अपना भाई माएकल माँझा, ज़िसका सबको बेसब्री से इंतेजार था, अपनी उमीदो पर खरा उतरती हैI अगर वाकई किसी कहानी को पढ़ने में मुझे हाल ही में सब से ज्यादा मजा आया हो तो वो है ज़ालिम मांझाI कॉमिक को पढ़ने के बाद जितनी ख़ुशी हुई उसे से एक ही ख्याल सबसे पहले आया की इसे कहते है फटा पोस्टर निकला हीरो।

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